
Gold Investing 2026–27: The Complete Guide to Gold Investment, Prices & Demand
Gold Investing 2026–27: The Complete Guide to Gold Investment, Prices & Demand
Transcript:
(00:00) देखिए गोल्ड की प्राइस 17,000 से सीधे 14,500 आ चुकी है। लगभग 15% का फॉल हो चुका है और अब फेस्टिव सीजन भी स्टार्ट हो चुका है। इसके अलावा जितने भी इन्वेस्टर्स हैं जो गोल्ड में इन्वेस्ट करते हैं सबके बीच में फिर से कंफ्यूजन आ गया है कि क्या यहां से गोल्ड के प्राइसेस के अंदर एक अच्छी रैली आएगी या फिर प्राइसेस यहां से और भी ज्यादा गिरेंगे। अब सोशल मीडिया के अंदर इससे रिलेटेड बहुत सारी हाइप बनी हुई है। कुछ लोग 5 लाख का प्रेडिक्शन भी देते हैं और कुछ लोग बोलते हैं कि 1 लाख के आसपास भी चला जाएगा। अब आपका यह कंफ्यूजन तब तक बना रहेगा जब तक आप गोल्ड की डिमांड
(00:33) और सप्लाई के फंडामेंटल रूल्स को प्रॉपर तरीके से समझ नहीं लेते हैं। सो इसलिए आज के इस वीडियो का ऑब्जेक्टिव बहुत क्लियर है। आपको बहुत डीपली डिमांड एंड सप्लाई जो कि गोल्ड के अंदर किस तरह से होती है और कौन-कौन से फैक्टर उसकी प्राइस को इन्फ्लुएंस करते हैं उसको बहुत डीपली जाके समझेंगे। करंट स्टि क्या पैदा हो रही है उसको भी बहुत डीपली अंडरस्टैंड करेंगे और लास्टली गोल्ड का डायरेक्शन किस तरह से होने वाला है उसके अकॉर्डिंग एक प्रॉपर स्ट्रेटजी क्या रहेगी चाहे आप लॉन्ग टर्म इन्वेस्टर हैं ट्रेडर हैं या फिर किसी फेस्टिव पर्पस या ओकेशनल पर्पस के लिए
Gold Investing 2026–27: The Complete Guide to Gold Investment, Prices & Demand
(01:03) गोल्ड खरीदना चाहते हैं तो उसका राइट टाइमिंग क्या हो सकता है तो इस वीडियो को एंड तक जरूर से देखिए बिकॉज़ आपको एक बार इस गोल्ड के कांसेप्ट की क्लेरिटी मिल गई तो आपको कोई भी सोशल मीडिया किसी भी प्रकार की न्यूज़ आपको कंफ्यूज नहीं कर सकती है। आप प्रॉपर तरीके से हर चीज को वैलिडेट करके अपना खुद का डिसीजन ले सकते हैं। सबसे पहले गोल्ड की डिमांड को समझते हैं। और देखिए इकोनॉमिक्स के अंदर एक बहुत सिंपल रूल है। किसी भी एसेट क्लास या सिक्योरिटीज के अंदर जभी भी सप्लाई कांस्टेंट रहती है लेकिन डिमांड तेजी से बढ़ती है तो उन एसेट क्लास के अंदर
(01:33) प्राइसेस ऑटोमेटिकली तेजी से बढ़ने लगते हैं। और गोल्ड के अंदर अगर डिमांड को समझना है तो उसके अंदर तीन ऐसे फैक्टर्स या रीज़ंस है जिसकी वजह से गोल्ड के अंदर डिमांड राइज़ होती है। सबसे पहला फैक्टर है यूएस करेंसी। देखिए जभी भी यूएस की करेंसी नीचे गिरती है उस दौरान गोल्ड के प्राइसेस तेजी से बढ़ते हैं और इसका रिवर्स यानी कि अगर करेंसी ऊपर पड़ती है तो गोल्ड के प्राइसेस नीचे गिरते हैं। उसका लॉजिक बहुत सिंपल है। बिकॉज़ पूरी दुनिया के अंदर गोल्ड जो है वो यूएस करेंसीज के अंदर ही ट्रेड होता है। तो जभी भी करेंसी डाउन होती है उस दौरान मोस्टली सारी कंट्रीज की
(02:05) परचेसिंग पावर बहुत अच्छे से इनक्रीस हो जाती है। इसी वजह से गोल्ड के अंदर एकदम से डिमांड राइज करने होती है। दूसरा रीज़न है जभी भी पूरी दुनिया के अंदर मैक लेवल के अंदर अगर चैलेंजेस आना स्टार्ट हो जाते हैं। चाहे जियोपिलिटिकल टेंशनंस हो, इकोनमिक क्राइसिस हो या फिर फाइनेंसियल मार्केट के अंदर क्राइसिस हो, उस दौरान हर इन्वेस्टर और किसान सिंपली अपनी इन्वेस्टमेंट को गोल्ड के अंदर शिफ्ट करना स्टार्ट करता है। बिकॉज़ उसका ऑब्जेक्टिव बहुत सिंपल होता है कि अपने पैसे को बिल्कुल सेफ जगह पे पार्क कर ले ताकि किसी भी तरीके की रिस्क हो तो गोल्ड उसको सेव
(02:32) कर सके और ये हम लोगों ने हिस्ट्री के अंदर पिछले कितने ही डिकेड्स के अंदर देखा है। तीसरा गोल्ड की सेगमेंट वाइज़ डिमांड भी एनालाइज़ करनी पड़ेगी। उसके अंदर चार सेगमेंट से गोल्ड के अंदर डिमांड आती है। पहला ज्वेलरी इन फैब्रिकेशन, दूसरा टेक्नोलॉजी यूज़, तीसरा इन्वेस्टमेंट यानी कि गोल्ड बार्स या फिर ईटीएफ और फट के थ्रू इन्वेस्ट होना और चौथा सेंट्रल बैंक्स भी गोल्ड को बाय करें। पर सरप्राइजिंगली जभी भी ज्वेलरी और फैब्रिकेशन के अंदर डिमांड बढ़ी है उस दौरान गोल्ड के प्राइसेस तेजी से नहीं बढ़े हैं। और अगर आप इस डाटा को देखेंगे
(02:58) तो आपको क्लियरली डिस्कवर हो जाएगा। 2013 14 जहां पे ज्वेलरी एंड फैब्रिकेशन की डिमांड या फिर उसका एलोकेशन तेजी से बढ़ा उस दौरान गोल्ड के प्राइसेस उतने तेजी से नहीं बढ़े बल्कि वहां पे और नेगेटिव फॉल हुआ है। लेकिन किसी के सामने अगर इन्वेस्टमेंट और सेंट्रल बैंक जो कि येलो के अंदर मार्क्ड है। जैसे ही उनका वेटेज और एलोकेशन तेजी से बढ़ता है उस दौरान गोल्ड के अंदर बहुत तेजी से प्राइसेस अप होते हैं। और जब आप ये तीनों ही फैक्टर्स को बहुत डिटेल और डीप तरीके से एनालाइज करेंगे तो आपको पता चलेगा सिर्फ एकमात्र ऐसी कंट्री है चाइना जो कि पिछले छ से सात
(03:26) साल के अंदर गोल्ड के प्राइसेस को हर फैक्टर के अंदर इन्फ्लुएंस कर रही है। ये कैसे हो रहा है इसको बहुत डिटेल तरीके से समझते हैं। अब देखिए यहां पे मैक लेवल पे इक्वेशन बहुत सिंपल सी बनी हुई है। इनफ्लेशन को कंट्रोल करने के लिए सारे सेंट्रल बैंक अपनी इंटरेस्ट रेट को अप कर रहे हैं। और यही हम लोगों ने यूएसए में भी देखा है। उन्होंने भी अभी रिसेंटली अपनी इंटरेस्ट रेट को ऊपर किया है। और हर कंट्रीज की इंटरेस्ट रेट अभी काफी ऊपर है। जिसकी वजह से यूएस की करेंसी भी राइज कर रही है और हम लोगों ने अभी रिसेंटली देखा था कि जैसे ही करेंसी राइज करती है यूएस
(03:52) की वहां पे गोल्ड के अंदर सप्लाई आना स्टार्ट हो जाती है। लेकिन अगर इस कॉन्टेक्स्ट को बहुत डिटेल से समझेंगे तो आपको क्लियर हो जाएगा कि क्योंकि यहां पे इंटरेस्ट रेट ऊपर हुआ है इसकी वजह से बॉन्ड मार्केट बहुत ज्यादा अट्रैक्टिव हो गया है और वहां पे सारी वेस्टर्न कंट्रीज जो है वो अपना पैसा बॉन्ड मार्केट के अंदर शिफ्ट कर रहा है। अब इसमें अगर आप ईटीएफ का डाटा चेक करेंगे तो आपको समझ में आएगा कि बहुत टाइम से यूरोप इसके अलावा नॉर्थ अमेरिका गोल्ड के ईटीएफ को बाय कर रहा था। इस वजह से गोल्ड की डिमांड राइज़ थी। लेकिन जैसे ही ये इंटरेस्ट रेट अप होना स्टार्ट
(04:19) हुए उन्होंने अपनी गोल्ड की बाइंग को स्टॉप कर दिया और यहां पे एशिया कंट्रीज से गोल्ड की बाइंग आ रही है और इसमें सबसे ज्यादा हाईली कंट्रीब्यूशन आ रहा है वो है चाइना का। वहीं अगर सेंट्रल बैंक्स की भी बात करेंगे तो यूजुअली वेस्टर्न कंट्रीज अपना फॉरेन रिजर्व बेसिकली यूएस करेंसी में रखता है। इसीलिए वजह से वह यूएस करेंसीज और बॉन्ड मार्केट्स को बाय कर रहे हैं। वहीं अगर चाइना के सेंट्रल बैंक्स की बात करें तो वो लगातार अभी भी गोल्ड को बहुत तेजी से बाय करते हुए जा रहे हैं। अब इसमें चाइना की बाइंग का रीजन आप समझेंगे तो बहुत सिंपल क्लियर है। यहां पे चाइना
(04:48) की करेंसी यूएस की करेंसी के मुकाबले बहुत स्ट्रांग है। यानी कि यूएस की करेंसी चाइना की करेंसी के मार्केट में फॉल कर रही है। उसकी वजह से चाइना के अंदर गोल्ड की परचेसिंग पावर काफी अच्छी हो जाती है। दूसरा रीजन वहां पे अदर एसेट क्लास जैसे कि वहां पर रियल स्टेट और बॉन्ड मार्केट के अंदर क्योंकि उनके इंटरेस्ट रेट बहुत कम है इसलिए वहां पर बहुत ज्यादा अट्रैक्टिव ऑप्शंस नहीं अवेलेबल है। इसीलिए उनकी नॉर्मल पब्लिक भी गोल्ड के अंदर अपना इन्वेस्टमेंट बढ़ा रही है। इसके अलावा अगर चाइना के सेंट्रल बैंक्स की स्पेसिफिकली बात करें तो उनकी गोल्ड
(05:14) डिमांड इसलिए इंक्रीज हो रही है बिकॉज़ वह अपनी करेंसी को गोल्ड के साथ में बहुत अच्छे से सपोर्ट देना चाहते हैं ताकि फ्यूचर में कभी भी कुछ ऐसी डीडोलराइजेशन वाली प्रॉब्लम क्रिएट हो तो वहां पे चाइना अपनी करेंसी को काफी स्ट्रांगली दूसरी इकॉनमीज़ के अंदर अच्छे से ट्रेड करवा सके। सो अगर आप इस मै इक्वेशन को बहुत अच्छे से समराइज करेंगे तो समझ में आ जाएगा कि इंटरेस्ट रेट बढ़ने से करेंसी राइज होने से बॉन्ड की अट्रैक्टिवनेस बढ़ गई है स्पेसिफिकली यूएस बॉन्ड की तो वेस्टर्न कंट्रीज अपना पैसा वहां पे शिफ्ट कर रहे हैं। इस वजह से गोल्ड के अंदर डिमांड नहीं
(05:42) आ रही है। वहीं अगर एशियन कंट्रीज की बात करें तो यहां पे चाइना लगातार अपनी नॉर्मल पब्लिक इन्वेस्टिंग एज वेल एज उनके सेंट्रल बैंक्स लगातार इसके अंदर बाय कर रहे हैं। इस वजह से ये प्राइसेस यहां पे स्टेबल हैं। लेकिन अब यहां से गोल्ड के फ्यूचर ट्रेंड की बात करें तो बहुत सिंपल है। चाइना का डिमांड यहां पे कंटिन्यू होना चाहिए और वेस्टर्न कंट्रीज से भी अगर गोल्ड की डिमांड बढ़ेगी तो डेफिनेटली गोल्ड के प्राइसेस बढ़ेंगे। लेकिन अब यहां पे अगर चाइना अपनी गोल्ड की बाइंग डिक्रीज करता है तो यहां से प्राइसेस और नीचे गिर सकते हैं। इसके अलावा बहुत सारे मैकोमिस्ट
(06:10) का भी एक पॉइंट ऑफ व्यू है। उनका मानना यह है कि बिकॉज़ दुनिया में अभी जिओपॉलिटिकल रिस्क बहुत हाई है। इसकी वजह से इकोनमी के अंदर बहुत ही बड़े क्राइसिस और क्रशेस हो सकते हैं। इसलिए उनका मानना है कि लोगों को अपनी हैेजिंग और सेफ्टी पर्पस के लिए गोल्ड को बाय करते हुए रहना चाहिए। इसलिए अगर आप एक लॉन्ग टर्म इन्वेस्टर हैं तो आप अपने पोर्टफोलियो के अंदर थोड़ा-थोड़ा गोल्ड बाय करते रहिए। लेकिन हां उसका एलोकेशन आपकी रिस्क एपिटाइट के अकॉर्डिंग प्रॉपर तरीके से डिसाइडेड होना चाहिए। वहीं अगर ट्रेडर्स की बात करें तो आप जब तक गोल्ड के अंदर कोई पॉजिटिव मोमेंटम या
(06:38) फिर कोई सेंटीमेंटली पॉजिटिव चीज नहीं होती है तब तक आप इसको होल्ड कर सकते हैं। सो अब तक आपको यह समझ में आ गया होगा कि चाहे गोल्ड हो या फिर कोई भी एसेट लॉस हो कोई भी स्टैटिक इन्वेस्टमेंट नहीं होता है। उसके लिए सबसे पहले आपको उनके फंडामेंटल रूल्स समझ में आने बहुत जरूरी है। और उसी के साथ में आपको उनको रेगुलरली ट्रैक करना पड़ता है। बिकॉज़ सिनेरियोस और सेंटीमेंट्स रेगुलरली चेंज होते रहते हैं। उसकी वजह से कई दफा फंडामेंटल रूल्स भी ब्रेक हो जाते हैं। आई अंडरस्टैंड कि एक नॉर्मल पर्सन के लिए इतनी टेक्निकल चीजों को रेगुलरली ट्रैक करना बहुत मुश्किल हो
(07:06) जाता है। इसी वजह से हम लोग इन्वेस्टमेंट से रिलेटेड चाहे मै न्यूज़ हो, म्यूच्यूल फंड्स हो, किसी भी तरीके का कोई भी न्यूज़ और इंपैक्ट आता है तो उसको डिटेल तरीके से एनालाइज करते हैं और आपके सामने बहुत सिंपलीफाई तरह से प्रेजेंट करते हैं। सो अगर आप भी रेगुलर अपडेटेड रहना चाहते हो और अपने इन्वेस्टमेंट को प्रॉपर तरीके से प्रोफेशनल तरीके से मैनेज करना चाहते हैं तो आप हमारी मोबाइल एप्लीकेशन को भी डाउनलोड कर लीजिए। बिकॉज़ वहां पर बहुत सारी इंफॉर्मेशन हम ऐसे ही फ्री ऑफ कॉस्ट पब्लिश करते हैं। और उसके अलावा हमारे चैनल को सब्सक्राइब करके बेल नोटिफिकेशन
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